जैन तीर्थंकर और जैन तीर्थ

munisuvrat swami

श्री मुनिसुव्रत स्वामी भगवान

परम आराध्य श्री मुनिसुव्रत स्वामी भगवान जिनके दर्शन मात्र से "शनि" का दुष्प्रकोप भस्म हो जाता है. द्वारिका नगरी का नाश हुआ तो यादवों द्वारा श्री...
Saraswati

“सरस्वती” स्पेशल (भाग-2)

"सरस्वती" स्पेशल (भाग-1) से आगे ..... 3.5 करोड़ श्लोक लिखने वाले श्री हेमचन्द्राचार्य ने "ॐ अर्हं मुखकमलनिवासिनी पापात्मा क्षयंकरि.." का मंत्र दिया है. इसे नकारने का...

“सरस्वती” स्पेशल (भाग – 1)

1. नवकार मन्त्र का महत्त्व सर्वस्वीकार्य है । प्रमुख कारण यह भी कि  इसमें व्यक्ति विशेष के बजाये पदों को नमस्कार किया गया है...

सरस्वती देवी

आचार्य भगवंत जब सूरी मंत्र की आराधना करते हैं तो वो सर्वप्रथम श्रुतदेवता यानि सरस्वती की ही आराधना करते हैं. श्रुतदेवता की स्तुति: कमलदलविपुलनयना, कमलमुखी कमलगर्भसंगौरी | ...

भगवान महावीर !

वास्तव में तो भगवान महावीर का आज च्यवन कल्याणक है पर हर्षातिरेक में इसे "जन्म" के रूप में मनाया जाता है क्योंकि ये पर्युषण...
jirawala parshvanath

श्री जीरावला पार्श्वनाथ भगवान

श्री जीरावला पार्श्वनाथ भगवान, मूलनायक श्री जीरावला पार्श्वनाथ भगवान आराधना मंत्र : ॐ ह्रीं श्री जीरावलापार्श्वनाथाय नम: तीर्थाधिराज :- श्री जीरावला पार्श्वनाथ भगवान, पद्मासनस्थ मुद्रा, श्वेत वर्ण,...

शत्रुंजय (पालीताणा) महिमा-4

पूर्व भूमिका :भाग-1 से 3 पहले पढ़ें. सुंगंधित इत्र, सुगन्धित फूल, कल कल बहती नदी-झरने, चांदी, सोना, रत्न वगैरह सभी "पृथ्वीलोक" में भी हम रोज...

शत्रुंजय (पालीताणा) महिमा-3

पूर्व भूमिका :भाग-2 दृष्टांत  : कण्डु राजर्षि : कुलदेवी अम्बिका देवी से शत्रुंजय जाने से मोक्ष प्राप्त होगा, ये जान कर कण्डु राजा प्रसन्न हुआ...

शत्रुंजय (पालीताणा) महिमा-1

श्री हेमचन्द्राचार्य जी ने भगवान आदिनाथ की स्तुति इस प्रकार की है : "आदिमम् पृथिवीनाथ-मादिमम् निष्परिग्रहम् आदिमम्  तीर्थनाथम् च, ऋषभस्वामिनं स्तुम: || प्रथम राजा, प्रथम मुनि...

शत्रुंजय (पालीताणा) महिमा-2

देवकृत शत्रुंजय गिरि  वर्णन : 1. अन्य तीर्थों में उत्तम दान, शील, पूजन, ध्यान इत्यादि करने से जो फल प्राप्त होता है, उससे "अनन्तगुणा" फल...
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