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जैन संस्कार

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“मतिज्ञान” (बुद्धि) का “उपयोग” तब है जब उसे नित्य नया सीखने में लगाया जाए...

अधिकतर लोग "मतिज्ञान" तक ही सीमित होते हैं शास्त्र का "उपयोग" क्या है, उसे स्वीकार नहीं करते, क्योंकि वहां तक "पहुँचते" ही नहीं ।इसका अर्थ ये हुआ...

ये आकृति किसकी याद दिलाती है?

ये आकृति किसकी याद दिलाती है?भगवान महावीर की! क्योंकि उनका ऐसा पूरा फोटो पहले से देखते आए हैं.इस फोटो के देखने पर आदिनाथ, शांतिनाथ...
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एक श्रावक का जीवन

अपनी सुविधा और बुद्धि-विवेक के बल पर ये करे:1 धर्म क्रिया 2 धर्म सम्बन्धी ज्ञान की वृद्धि 3 ज्ञान का उपयोग 4 ज्ञान की सुरक्षा5 धन उपार्जन 6 धन...
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कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग इन तीनों का समन्वय हो भी सकता है,...

कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योगइन तीनों का समन्वय हो भी सकता है, नहीं भी !  विश्लेषण: ----------जो "कर्म" पर "ही" फोकस्ड हैं, उनका जीवन शुष्क हो...

हे महावीर!

हे प्रभु!वीर वीर!महावीर!!!तार देना!पार लगा देना!!मुझ में शक्ति नहींऔर कुछ...

“रक्षा-बंधन” स्पेशल

"जग चिंतामणि जग नाह.... जग रक्खण जग बन्धव......." "अरिहंत" जगत के "नाथ" हैं जगत के "बंधू" भी हैं. और जगत की "रक्षा" करने वाले भी हैं. "बंधू" मतलब "भाई" हैं. और "रक्षा"...

माता और पुत्र

 माता और पुत्र एक गुरूजी ने आदेश दिया है कि मैं "माता पदमावती" पर कुछ लिखूं."माता" पर "पुत्र" क्या लिखेगा? पुत्र जब माता के पास हो तो माता...

प्रभु दर्शन

सवेरे सवेरे प्रभु दर्शन क्यों करें?जैसा हम रोज देखते हैं, वैसे ही विचार भी आते हैं. रोज सवेरे सवेरे "चोर" और "डाकुओं" को कौन देखना...

मन और वचन की महत्ता है शरीर की नहीं.

"मन" और "वचन" कीजितनी "महत्ता" हैउतनी "काया" (शरीर) की नहीं.यदि होती,तो वेश्याएं "पूजी" जातीं.("खोपड़ी" हिला देने वाली बात है). "सुन्दर पुरुष...
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