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ध्यान और स्वप्न” में जिन्हें “एक बार” भी प्रभु दर्शन हुवे हैं, वो शीघ्र...

"ध्यान और स्वप्न" में जिन्हें "एक बार" भी प्रभु दर्शन हुवे हैं, वो शीघ्र मोक्षगामी हैं. ऋषिमंडल स्तोत्र में स्वयं भगवान महावीर ने फरमाया है...

ध्यान के चार प्रकार

मनुष्य हर पल ध्यान में ही रहता है , ध्यान के बिना वह रह नहीं सकता.आर्तध्यान ------------- रोना, डिप्रेशन में होना, चिंता करना, बार बार...

ध्यान के बारे में अति विशेष

ध्यान कैसे करना - उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारीमति ज्ञान का ध्यानमति यानि बुद्धि! बुद्धि का ध्यान!किसी और की नहीं... अपनी ही बुद्धि का ध्यान!ऐसा...
dhyan ke anubhav

ध्यान में जो अनुभव होते हैं वो पुस्तकों से नहीं मिलते

"ध्यान" में जो "अनुभव" होते हैं वो पुस्तकों से नहीं मिलते. पुस्तकों की "वहां तक" पहुँच ही नहीं होती !विडम्बना:आज अधिकतर साधू और श्रावक "पढ़ने" पर...

“ध्यान” करते हुवे भी “ध्यान” नहीं है !

"ध्यान" करते हुवे भी "ध्यान" नहीं है !पढ़कर चौंकना मत !अब तक जीवन में सामायिक और प्रतिक्रमण करते समय 1 लोगस्स से...

काउसग्ग करते समय 1 लोगस्स = 4 नवकार – ऐसा क्यों ?

प्रश्न:काउसग्ग करते समय 1 लोगस्स = 4 नवकारऐसा क्यों?क्या लोगस्स सूत्र,नवकार से 4 गुना बड़ा है?उत्तर:१. कुछ जैनों को नवकार से आगे...
bhagwan mahaveer

मति, श्रुत, अवधि और मन: पर्यव ज्ञान होने पर भी भगवान महावीर ने “ध्यान”...

मति, श्रुत, अवधि और मन: पर्यव ज्ञान होने पर भी भगवान महावीर ने "ध्यान" किया.वर्तमान में क्या हो...

ध्यान कैसे करें?

1. अगर हम संस्कृत भक्तामर स्तोत्र के श्लोक को आँख बंद करके पूर्ण ध्यान से, अपनी बुद्धि के अनुसार धीरे धीरे शुद्ध पढ़ें तो...

क्या समय बदल गया है?

ये कहा जाता है कि अब समय "बदल" गया है. "समय" तो आज से नहीं, "हर समय" बदलता है. हर "क्षण" बदलता है.हम बदलते हैं हमारी "सोच" के कारण !यदि...
dhyaan aur avadhi gyan

काउसग्ग : जैन विधि से “ध्यान” की “सरलतम” व्याख्या

काउसग्ग : जैन विधि से "ध्यान" की "सरलतम" व्याख्याकाउसग्ग में सबसे पहले "शरीर" का भान भूलना है. (जैसे कि "दिगंबर" साधू अपने "शरीर" का भान...
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