ये धर्म प्राप्ति का मास्टर स्ट्रोक है!

ये धर्म प्राप्ति का मास्टर स्ट्रोक है! धर्म के साधन प्राप्त होना, धर्म प्राप्ति होना और धर्म का टिके रहना - ये तीनों जरूरी हैं. अधिकतर का धर्म व्याख्यान...

Shri Avanti Parshwanath Ujjain – गाथा श्री अवन्ति पार्श्वनाथ की

कल्याण मंदिर स्तोत्र की रचना का रहस्य : नवकार के लघु स्वरुप की रचना करने के कारण संघ से बाहर निकाला गया प्रकांड पंडित श्री सिद्धसेन दिवाकर को, शर्त्त रखी गई यदि कोई प्रभावक कार्य करेंगे तो संघ में वापस लिया जाएगा फिर क्या हुआ जानने के लिए देखें ये डाक्यूमेंट्री फिल्म..

सामायिक एक श्रावक की !

सामायिक एक श्रावक की ! सामायिक करते समय क्या श्रावक मोबाइल का प्रयोग करता है? सामायिक करते समय क्या श्रावक बिज़नेस और घर की बात करता...

ध्यान के बारे में अति विशेष

ध्यान कैसे करना - उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मति ज्ञान का ध्यान मति यानि बुद्धि! बुद्धि का ध्यान! किसी और की नहीं... अपनी ही बुद्धि का ध्यान! ऐसा...
chandra prabhu swami

धर्म को सोने से भी ज्यादा मूल्यवान क्यों माने ?

धर्म एक सोना सोना खरीदने की जिसकी हैसियत है वो बार बार सोना खरीदते हैं. सोना खरीदने की सभी की हैसियत न होने के कारण जिसके पास जो...
namo loye savv sahunam

नमो “आयरियाणं” में सभी सम्प्रदाय के आचार्यों को नमस्कार करना होता है

नवकार सिद्धि "एक" ही "आचार्य" को जानते हों, और उन्हें नमस्कार किया तो सिद्धि मिल सकती है पर दूसरे आचार्य को "जानते" हुवे भी नमस्कार करने का भाव "नहीं"...

जावंति चेइआइं सूत्र

"जावंति चेइआइं" इस सूत्र को पढ़ने मात्र से सारे जैन तीर्थों को वंदन हो जाते हैं - ब्रह्मांड में कहीं भी स्थित हों. - ये सूत्र...
jag chintamani sutra

श्री जग चिंतामणि सूत्र

जो भी मनुष्य “अष्टापद तीर्थ” की यात्रा खुद के बलबूते (लब्धि) से कर लेता है वह उसी भव में मुक्त हो जाता है” –...

एक बूंद जीवन

एक बूँद जीवन अनंत काल के जीवन में से इस  मनुष्य जीवन के काल की बात करें तो ये महासागर की एक बूँद बराबर भी...
dhyan ke anubhav

ध्यान में जो अनुभव होते हैं वो पुस्तकों से नहीं मिलते

"ध्यान" में जो "अनुभव" होते हैं वो पुस्तकों से नहीं मिलते. पुस्तकों की "वहां तक" पहुँच ही नहीं होती ! विडम्बना: आज अधिकतर साधू और श्रावक "पढ़ने" पर...