तत्त्वबिन्दु

१. नव तत्त्व जाने बिना जैन शास्त्रों का  रहस्य समझ में नहीं आ सकता.
नव तत्त्व हैं:-
१. जीव
२. अजीव
३. पुण्य
४. पाप
५. आश्रव
६. संवर
७. निर्जरा
८ बंध
९. मोक्ष

( जैन शास्त्रों में इनका विस्तृत विवरण है. इन पर हज़ारों ग्रन्थ लिखे गए है. उन पर अनेक भाष्य, चूर्णी और टीकाएँ भी लिखी गयी हैं).

 

२. पुण्य के बिना ये प्राप्त नहीं होते.
(जिसे ये प्राप्त हैं, वो भाग्यशाली हैं):-

१. अच्छे स्थान में रहने की व्यवस्था
२. धार्मिक वातावरण वाला शहर/गाँव
३. अच्छी जाति
४. अच्छा भाई
५. श्रेष्ठ पिता
६. श्रेष्ठ माता
७. अच्छा कुल
८. शारीरिक बल
९. अच्छा पति/अच्छी स्त्री
१०.आज्ञाकारी पुत्र (पुत्री का वर्णन नहीं है, ये माना गया है कि “पुत्री” आज्ञाकारी ही होती है – इस पर किसी को शंका हो तो, प्रश्न करें )

 

११. गुरुओं का संयोग
१२. सुपात्र दान – गुरु को खप वाली वास्तु वोहराना
१३. समाज में प्रतिष्ठा
१४. अच्छा रूप
१५. सुविधा
१६. सुदेव (तीर्थंकरों के नित्य दर्शन, पूजन)
१७. सुगुरु (मोक्ष मार्ग चलने वाले)
१८. सुधर्म (मोक्ष मार्ग बताने वाला)
१९. सुदेशना  (मोक्ष मार्ग बनाते वाले धर्म का श्रवण,चिंतन और मनन)

Homework: 🙂
जरा अपना स्कोर चेक करो और ये भी देखो कि “प्राप्त” करने से बाकी क्या बचा.

 

३. “पुण्य” की इच्छा से की गयी धार्मिक क्रिया “मिथ्यात्व” है 

भले ही जैन मंत्र जप का सहारा ही क्यों ना हो- इतना सूक्ष्म जैन धर्म है – कोई ये जानकर “जैन धर्म” से विमुख भी होता है पर “सच्ची बात” कहने में जैन धर्म को कोई संकोच नहीं है – जैन साधुओं को उसकी परवाह नहीं है कि ऐसा स्पष्ट कहने से कई व्यक्ति उनके पास ना आकर ज्योतिषिओं  के पास जाएंगे.

 

शंका:
तो फिर अभी तक jainmantras.com में तो जैन मन्त्रों  द्वारा “सुख” प्राप्त करने की बात कही गयी है, उसे क्या समझें?

 

समाधान:
जैन धर्म कोई दुःख पाने की विधि नहीं बताता. कभी एक वाक्य भी लिखा हुवा मिलेगा कि “धर्म” करने से “दुःख” की प्राप्ति होगी? जैन मन्त्रों में “जिनेश्वर” और “समकितधारी देवों” का “सान्निध्य” ही तो प्राप्त होता है. हां, “मन” को मतबूत रखने के लिए मंत्र का फल क्या होगा, ये भी लिखा गया है. जैसे “लघु शांति” और “उवसग्गहरं” स्तोत्र में ये साफ़ बताया गया है की स्तोत्र/मंत्र स्मरण का फल क्या होगा.

और तो और महामंत्र नवकार में भी तो यही बात आती है : “सव्व पावप्पणासणो” – सारे पापों का नाश करने वाला! सब पाप नाश होंगे तो फिर क्या बचेगा?

मोक्ष!

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