“नमुत्थुणं सूत्र” रहस्य

नमुत्थुणं सूत्र
कौन बोलता है
और कब?

नमुत्थुणं सूत्र
जिसे शक्रस्तव भी कहा जाता है.

भगवान के च्यवन और जन्म कल्याणक
के समय इसे इन्द्र बोलते है.

नमुत्थुणं सूत्र में

अरिहंतों
को ३६ विशेषण लगाये गए हैं.

 

श्रावकों को नमुत्थुणं बोलने का अधिकार
गणधरों ने क्यों दिया?

भगवान चतुर्विध संघ की स्थापना करते हैं और
स्वयं उसी संघ को “नमो तिथस्स” बोलकर नमस्कार करते है.

पूरे विश्व में कभी कहीं ऐसी व्यवस्था किसी धर्म में देखी है?

जो व्यक्ति गुणों को अपनाते है वो पूजनीय होते है.
मात्र वेश नहीं.
(स्वयं भगवान महावीर ने कर्म को सबसे ऊपर बताया है).

चूँकि श्रावक एवं श्राविकाएं जिन धर्म को अंगीकार करते है.
श्रावक के २१ गुणों को धारण करते है. इसलिए वो इन्द्र से भी ऊपर है.

 

क्या इस बात का विश्वास आता है आपको?

मात्र मनुष्य भव में ही जीव साधना कर सकता है.
देव लोक तो भोग भूमि है.

नमुत्थुणं  सूत्र श्रावक को तीन समय बोलने का अधिकार दिया गया है :

सवेरे : प्रतिक्रमण के समय
फिर : जिन पूजा करने के बाद चैत्यवंदन करते समय
सायं : प्रतिक्रमण के समय

अब तो समझ आया होगा कि गणधरों और आचार्यों ने
हमारे ऊपर कितना उपकार किया है.

 

फोटो:

श्री महावीर स्वामी जिनालय,
कैलाशनगर, सूरत

(इस मंदिर की प्रतिमा बड़ी प्रभावशाली है
और हर महावीर कल्याणक  और पर्युषण  पर्व
पर अति भव्य आंगी होती है –
रोज १००० से अधिक श्रावक दर्शन-पूजन करते हैं ).

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