“जावंति चेइआइं”

इस सूत्र को पढ़ने मात्र से सारे जैन तीर्थों को वंदन हो जाते हैं – ब्रह्मांड में कहीं भी स्थित हों.

– ये सूत्र दिगंबर और श्वेतांबर साधूमार्गीयों (स्थानक वासी और तेरापंथी) में नहीं है.

इस का जाप आज से 5 साल पहले कई सदस्यों को दिया जो पुराने ग्रुप से जुड़े रहे हैं. सबको अद्भुत परिणाम मिले.

इसका अर्थ ये भी हुआ कि जैन मंदिरों में प्रतिमा स्थापित करने की “धारणा” और” व्यवस्था “है, वो मिथ्या नहीं है, सत्य ही है.

क्योंकि उसका अनुभव उन लोगों को भी हुआ जब उन्हें जाप करते समय और स्वप्न में उन प्रतिमा जी के दर्शन भी हुवे जिन मंदिरों में वो कभी गए ही नहीं थे.

ध्यान में वो बात कभी नहीं आती जो कभी हुई नहीं है!

साधारण तौर पर ध्यान में थोड़ा सा आगे बढ़ते ही डरावनी आकृतियां भी आती हैं, गुरु के निर्देश बिना ध्यान करने पर साधक डर जाते हैं और ध्यान करना ही छोड़ देते हैं.

पर “जावंति चेइआइं” सूत्र पुण्य का वो पोटला है जिसे आज तक खोलकर देखा ही नहीं गया.

इस सूत्र को बोलने में अधिकतर श्रावक 5 सेकंड लगाते हैं और सूत्र पूरा!

प्रभाव कहाँ से देख पाएंगे? 🙄

इस छोटे से सूत्र में सारे तीर्थ समा गए हैं.

🌹 महावीर मेरा पंथ 🌹