जैनों की तपस्या कैसी हो?

बिना विवेक के तपस्या करने वालों के लिए ये सूत्र आँखें खोलने जैसा है.

अपने शरीर की शक्ति से ऊपर तपस्या करना, अविवेक है.

तप उतना ही करें, जब तक मन में प्रसन्नता रहे.

ये “चिंतन” ना आये, कि “अट्ठाई” करनी है और पूरी होने में अब दो दिन बाकी हैं.
रात को तो नींद नहीं आती, पाँवों में जलन होती है.

यदि ऐसा होता हो, तो “उपवास” वहीँ पर “पूरा” कर लें.
“लोग” क्या कहेंगे, उसकी चिंता ना करें.
“उपवास” आपको करना है, लोगों को नहीं.

चिंतन करना है तो :

“आत्मा का”

यानि –

“आत्म-निरीक्षण” का
“आत्म-परीक्षा” का
“आत्म-शुद्धि” का
“आत्म-साधना” का
“आत्म-उद्धार” का

समस्त जीवों में “आत्मा” देखे
सिर्फ उसका ऊपर का “व्यवहार” ना देखे.

विशेष:
******
बच्चों में “उपवास” के प्रति “भाव” लाना अच्छी बात है
परंतु उससे भी “अच्छी” बात है कि
वो “सूत्र” पढ़ें, सूत्र अर्थ सीखें और आगे जाकर सूत्र रहस्य” जानें

तभी “जिन-धर्म” की “सच्ची प्रभावना” होगी.

वरना तो “मास-क्षमण” की तपस्या के बाद भी
भाइयों और बहिनों को “शौक से आलू-प्याज-लहसुन” और”रात्रि भोजन” करते देखा है !

“आत्मा-का-उद्धार” गया “भव-समुद्र” के “पानी” में !

jainmantras.com

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...