नमस्कार और आशीर्वाद – 6

प्रभु के दर्शन कैसे करें?

पूर्व भूमिका:
किसी से “रिश्ता” जोड़ते समय बहुत सावधानी और चतुराई बरती जाती है.
पूरी छान बिन की जाती है,
परिवार के बारे में,
धंधे के बारे में,
चालचलन के बारे में,
पढाई के बारे में, इत्यादि.

 

फिर हम तैयारी करते हैं,
अच्छे से अच्छे कपड़े  पहनते हैं.
सिर्फ अच्छे कपड़े  होने पर भी हमें संतोष नहीं होता.
हम ये भी देखते हैं कि वो हम पर पूरी तरह “जच” रहे हैं या नहीं.
बातचीत के तरीके को इतना प्रभावशाली बनाने की कोशिश करते हैं
जितना  हम “अन्य” समय में नहीं करते.

ऐसा क्यों?
इतनी “केयर” तो हम किसी से धंधा करने के समय भी नहीं करते
जबकि बात तो हर समय “धंधे” की ही करते हैं.

ऐसा इसलिए है कि हम “जीवन” भर के लिए एक “सम्बन्ध” बनाने जा रहे हैं.
मंदिर में “दर्शन” करने से पहले  अब कुछ प्रश्न खुद से :

१. क्या भगवान से हमारा “सम्बन्ध” जुड़ गया है?
(इस बारे में तो अभी तक “विचार” ही नहीं किया).
२. जुड़ा तो “कब” जुड़ा?
(नहीं पता)
३. वो “सम्बन्ध” वैसा ही है या उसमें बढ़ोतरी हुई है?
(चेक करना बाकी है, ये प्रश्न ही कभी दिमाग में नहीं आया)

ये प्रश्न उनके लिए हैं तो ये कहते हैं कि मैं “मंदिर” “जाकर” “आ” रहा हूँ.
वो जाकर आने में देर नहीं लगाता,
क्योंकि 
मंदिर में बस “अटेंडेंस” लगाने के लिए जाता है.

 

प्रश्न:
क्या मात्र “अटेंडेंस” लगाने वाले स्टूडेंट को “शिक्षा” मिलती है?
उत्तर है : नहीं. परन्तु “अटेंडेंस” लगाने से उसे “एग्जाम” में बैठने की पात्रता जरूर मिल जाती है.  

जिज्ञासा:
तो रोज मंदिर बस “दर्शन” करने के लिए गए और आये, उनकी पात्रता के बारे में क्या कहें?
उत्तर:
तो भी “धर्म” की एग्जाम  में बैठने की “पात्रता” तो ले चुकें हैं
परन्तु “फ़ैल” होने के लिए!

क्योंकि “प्राप्त” कुछ किया ही नहीं.

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...