“आत्म-चिंतन” : भाग – 2

500 शिष्यों के नायक “इंद्रभूति” (गौतमस्वामी) को इस बात का संशय था कि

“आत्मा” है या नहीं!

(कहे जाने वाले बड़े बड़े सम्प्रदायों; जिनके लाखों फोल्लोवेर्स हों,

उनकी भी यही स्थिति हो सकती है).

मात्र ये एक “संशय” उनके पूरे “ज्ञान” को “झकझोर” रहा था (Feeling irritated).

(जैसे परीक्षा में  टिपिकल प्रश्न का उत्तर देते समय मात्र  उसका एक पॉइंट ही विद्यार्थी को उलझन में डाल  देता है और यदि वो  प्रश्न भी पहला ही  हो तो फिर परीक्षार्थी पूरा पेपर ही अच्छी तरह नहीं दे पाता…).

 

और भगवान महावीर से उस “शंका” का निवारण होते ही, उनके शिष्य भी बन गए!

“शंका” मात्र एक…. और जिसने वो शंका मिटाई, उसका “शिष्य” बन जाना…खुद के 500 शिष्यों के होते हुए !

मानो कि ये “घटना” आपके लिए ही घटी हो – मतलब आप ही “इंद्रभूति” थे और आप के ही 500 Followers  थे…..(आजकल फेसबुक में भी आपके कई फोल्लोवर्स होते हैं…), उनके मन में आप के प्रति क्या विचार आया होगा!…..कि आज तक हम उस आदमी को Follow (फॉलो) कर रहे थे जिसे जड़ और चेतन का भी ज्ञान नहीं था!

परन्तु “गौतमस्वामी” ने अत्यंत “विनयपूर्वक” उसे ना सिर्फ उनके स्पष्टीकरण को “स्वीकार” किया, बल्कि खुद को “पूरा” “भगवान महावीर” को “सौंप” दिया.

 

आप सोच रहे होंगे कि क्या ऐसे गौतम स्वामी को “आत्मा” जैसी बात का भी ज्ञान नहीं था?

प्रश्न की पूर्वभूमिका:

भगवान महावीर द्वारा “आत्मा” की शंका का निवारण करने के कारण और ‘आत्मा’ के बारे में यही ज्ञान  हमारे आचार्यों, उपाध्यायों और साधुओं  की पट्ट परंपरा के कारण  हमें और हमारे पूर्वजों को प्राप्त होता रहा है.

आत्म-चिंतन :

क्या आपको ये “ज्ञान” हो गया है की आप ये मनुष्य जीवन “आत्मा” की उन्नति के लिए जी रहे हैं?

क्या ऐसा कभी “एहसास” (feeling) हुआ है कि “आत्मा” (soul) का “अस्तित्व” (existence) इस “शरीर”(body) में है,

यदि हाँ, तो समझ लेना “आत्मा” के “उद्धार” (moksh) की तैयारी शुरू हो गयी है.

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...