श्री चैत्यवंदन सूत्र

जिसकी रचना अनंत लब्धिधारी श्री गौतम स्वामीजी ने

अष्टापद महातीर्थ पर की है.

 जगचिन्तामणि जगनाह जगगुरु

जगरक्खण जगबंधव जगसत्थवाह

जगभावविअक्खण अठ्ठावय संठवीअ

रूव कम्मठ  विणासण

चउवीसंपि जिणवर जयंतु

अप्पडिहयसासण ll

 

अर्थ:

१. भव्य जीवों (मोक्ष की इच्छा रखने वाले जीवों) को

२. चिंतामणि रत्न के समान

(चिंतामणि रत्न जिसके पास होता है, उसकी सारी  इच्छाएं पूरी होती हैं),

३. भव्य जीवों के नाथ,

४. जगत के गुरु,

५. छ जीव निकाय के रक्षक,

 

६. सभी जीवों के बंधू,

७. मोक्ष की इच्छा रखने वाले जीवों के सारथी,

८. छ द्रव्य के बारे में बताने में विचक्षण,

९. अष्टापद पर्वत के ऊपर २४ जिनेश्वर

(चउवीसंपि जिणवर)

के स्थापित बिम्ब (चैत्य),

जिन्होनें आठ कर्मों  का नाश किया है,

(ये चैत्य श्री भरत चक्रवर्ती ने बनाये हैं).

 

उन सभी की जय हो!!

जो जिन मंदिर नहीं जाते,

और ऊपर से जिन मंदिरों का निषेध भी करते हैं,

वो जैनी कितने बड़े सुख से वंचित हैं

क्योंकि वो गौतमस्वामीजी के रचित

चैत्यवंदन सूत्र को

लाखों जिनमंदिर

होते हुए भी

बोलने में अपने को असमर्थ पाते  हैं !.

फोटो:

१७ लाख वर्ष प्राचीन तीर्थ
श्री मुनिसुव्रत स्वामीजी (अश्वाव्बोध तीर्थ )
जहाँ पर उन्होंने अपने पूर्व भव के मित्र
जो इस समय घोड़े के रूप में था,
उसे प्रतिबोध दिया.

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...