पर्युषण पर्व पर जैन घरों का “वातावरण” एकदम पवित्र हो जाता है.
“धर्म क्रियायों” का “जोर” रहता है.
आपस में बातें भी इसी प्रकार की होती हैं.
घर में एक जन तप शुरू करता है तो उसका “रंग” दूसरों को भी “चढ़ता” है.
फिर इसका असर “शाता” पूछने वालों पर भी आता है.

पर जीवन शैली और कार्य पद्धति बदल जाने के कारण कई जैनी पर्युषण पर्व पर भी “तप” नहीं कर पाते.
हालांकि बचपन के संस्कारों के कारण उनमें ये “इच्छा” रहती है कि पर्युषण पर कम से कम किसी भी प्रकार का तप करें.

 

सबसे पहला प्रश्न है :
तप क्यों किया जाए?
उत्तर ये नहीं है कि –

“करना” चाहिए!
सभी करते ही हैं इसलिए हमें भी करना चाहिए.
(बच्चे स्कूल इसलिए जाते हैं क्योंकि दूसरे बच्चे भी स्कूल जाते हैं) 🙂

“तप” से मन में एक प्रकार की जाग्रति आती है.
(ये बात रोज तप करने वाले के लिए काम लागू पड़ती है – क्योंकि ज्यादातर किस्सों में वो “आदत” में बदल जाती है).

 

दूसरा प्रश्न है:
हमें किस प्रकार की जाग्रति चाहिए?
उत्तर है :
तप से जाग्रति होती है – मन की.
(नीचे इसका खुलासा पढ़ें).

तीसरा प्रश्न है:
तप करने से क्या प्राप्त हुआ – इसकी जांच कौन करेगा?
उत्तर :
इसका उत्तर तो अच्छे अच्छे भी नहीं दे पाएंगे.
कारण?
मासक्षमण करने वाले भी कुछ दिन बाद ही “रात्रि-भोजन” करते हुवे मिल जाएंगे!
इसका मतलब ये हुआ कि 30 बोतल खून चढ़ा और ठीक होने के बाद फिर शरीर में वही “डालना” शुरू किया जिसके कारण “खून” चढ़ाना पड़ा था.

 

तीर्थंकर कहते हैं कि तप से कर्मों की निर्जरा (जैसे घर में कचरा पड़ा हो और उसे साफ़ किया जा रहा हो) होती है.

अब एक बार तीसरे प्रश्न और उसके उत्तर को दोबारा पढ़ें.
मासक्षमण करने वाले को बाद में क्या करना चाहिए, कहने की जरूरत नहीं है.

(घर से धूल साफ़ करने के बाद वापस वहीँ पर धूल कौन डालेगा – अपने आप कचरा जो आये, वो बात अलग है)

ये तो हुआ तप पर चिंतन.
बात थी : तप को सरलतम तरीके से कैसे किया जाए कि काम भी कर सकें और “शरीर” को कष्ट भी ना पहुंचे.
(कुछ ना कुछ तो करें).

 

उपाय:
हमने देखा है कि “ट्रैवलिंग” में पानी की बोतल लिए लोग “घूमते” हैं.
आप भी “बॉयल्ड वाटर” की बोतल अपने पास रखें और ‘चेतना” रखें कि आप का “भव-भ्रमण” चालू है.
और जब भी पानी पीना हो, उससे पहले मन में तीन नवकार गिनें
और पानी पीने के बाद भी तीन नवकार गिने.
“कुछ” भी “खाएं” तो भी ऐसा ही करें.
आपको लगेगा कि आप भी “कुछ तप” कर रहे हैं.
ऐसा करने के बाद आपका अनुभव कैसा रहता है, वो जरूर बताएं.

विशेष:- नवकार गिनते समय आपकी नज़र खाने की वस्तु और पानी पर रहे.

 

अति विशेष:
जैन धर्म में “तप” को यथाशक्ति करने को ही कहा गया है.
और जानने के लिए jainmantras.com  द्वारा अगले वर्ष पब्लिश होने वाली पुस्तक का इंतज़ार करें:
जैनों की समृद्धि के रहस्य

टिपिकल प्रश्न:
“प्याज सहित आलू” की सब्जी हो तो क्या “नवकार” गिनते हुवे खाना खा सकते हैं क्या?
उत्तर आपको “जाग्रत मन” से देना है.

Note: This post is especially written for those who are “unable” to do any type of fast in Paryushan festival. Please don’t take it as universally acceptable in Jainism.