नवकार मंत्र की प्रभावकता-1

आज तक हमने  हजारों/लाखों नवकार “रटे” होंगे

पर रहे तो हम “तोते के तोते” ही!

ज्ञान के बिना जिस प्रकार एक तोता रटता है, उसी प्रकार हमने भी अभी तक
“नवकार” रटा है पर उसके बारे में “अनुभव” करने की चेष्टा नहीं की.

(तोते के लिए अच्छी बात ये है कि उसे “रटने” की “विद्या” आती है और उसकी “आवाज” अच्छी लगती है – शुरुआत में हम भी अपने बच्चों को नवकार “रटाते” ही है और उनके मुह से नवकार सुनना बहुत अच्छा लगता है ).

 

हमारा मूल विषय है नवकार का प्रभाव जानने का.

नवकार के प्रभाव को “तीर्थंकर” भी अपनी “वाणी” से बताने में असमर्थ हैं, ऐसा वो स्वयं कहते हैं और यदि कोई ऐसा कहे तो हमें उस  विषय के बारे में जानने की ख़ास उत्सुकता होती है कि

“ऐसा उसमे क्या है?”

नवकार के प्रभाव मात्र एक “झलक” नीचे लिखे “शब्दों” से पता पड़  सकती है.

थोड़ी देर के लिए सब कुछ भूल कर मात्र दो सेकंड के लिए आखें बंद कर के मन में  बड़े आनंद से बोलो :

“नमो अरिहंताणं”

अब कल्पना करो कि मन में बोला हुआ ये पद “पूरे ब्रह्माण्ड” में गूँज रहा है.

(बोला हुआ “अक्षर” कभी “क्षय” नहीं होता – इसलिए बोलते समय बहुत ध्यान से घर और बाहर; अच्छे शब्दों का ही उच्चारण करना चाहिए). 

“नमो अरिहंताणं” कहने के साथ ही
भूत, वर्तमान और भविष्य में होने वाले
सभी “तीर्थंकरों” को एक साथ नमस्कार हो जाता है.

 

चिंतन : 

यदि ये “पद” नहीं होता तो क्या हम ऐसा नमस्कार कर सकते थे?

अब चिंतन का विषय ये है कि इतना  बड़ा “विस्तार” लिए
ये नमस्कार किया किसने?

हमने!!!!

मतलब इस पद के “गर्भ” में इतनी बड़ी भावना होने के कारण हमने आज तक जितने तीर्थंकर हुवे हैं या होने वाले हैं,

उनको मात्र दो  सेकंड में नमस्कार कर लिया!

ये ताकत है :

नमो अरिहंताणं पद की!

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