साधना के वो 7 दिन

साधना के 7 दिन
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(धर्म चक्र मंत्र आराधना)

अंकल जी To be honest ….
आज यही अनुभव हो रहा है कि एक स्थानकवासी परिवार में…. जन्म लेकर मैंने अपनी जिंदगी के इतने साल waste कर दिए ।

सीखा बहुत कुछ, ज्ञान भी पाया
पर उस ज्ञान को जीवन में कैसे apply करना
ये सिखाने वाला कोई नहीं था ।

जब भी गुरुदेव के दर्शन करने जाते
एक साथ 5-5 सामायिक भी की ,
पर समता रखना नहीं आया । ?

साधना करते हुए 7 दिन हुए ,
और ये 7 दिन मेरी पिछली पूरी जिंदगी से अलग और स्वर्णिम हैं ।

काश ! ये साधना, ये ध्यान पहले सीख लिया होता ।
– MP से
सार :
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जीवन की प्रारंभिक शिक्षा कभी फालतू नहीं होती.
प्राइमरी एजुकेशन में सभी को सारे सब्जेक्ट्स पढ़ाये जाते हैं ..
ग्रेजुएशन के समय तक भी ऐसे अनेक सब्जेक्ट्स होते हैं
जिनका जीवन में कोई उपयोग नहीं होता.
पर इन्हीं से हमें अपने भविष्य के लिए चुनना होता है.
ज्ञान अलग है, डिग्री अलग है, अनुभव होना अलग है…

पर धर्म के विषय में गड़बड़ तब होती है
जब शास्त्रों को ही जब सब कुछ समझ लिया जाता है
ये गड़बड़ आज भी हो रही है.. लगातार..

शास्त्र इतने सरल होते तो इतना सब लिखने की जरूरत नहीं पड़ती

शास्त्र उस भाषा में लिखे हुवे हैं
जिस भाषा का आम जनता में कोई प्रचलन नहीं रहा.

शास्त्र ही यदि सब कुछ हैं…
तो शास्त्रों में *विवेक* की बात करने की
जरूरत ही कहाँ थी!

और द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की बात की भी
जरूरत कहाँ रहती!

शास्त्रों के आधार पर विधि बनाई जाती है…
ये विधियां अनेक प्रकार की होती हैं..
पर हमने इसमें भी संप्रदाय को घुसा दिया.

इसीलिए jainmantras.com में साधना की विधियां अलग अलग बताई हैं जब ग्रुप में साधना करते हैं तो सबके लिए एक सी हैं ..

वरना अलग अलग भी, जैसी जरूरत पड़े !

विशेष:
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“साधना” Golden Gate है.

गोल्डन गेट तक पहुँचने के लिए स्वयं को तैयार भी करना होता है

आगे फिर मिलता है : Gold ही Gold !

?महावीर मेरा पंथ ?
jainmantras.com

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