ज्योतिष और शुभ मुहूर्त्त

सभी को “भविष्य” कैसा होगा, ये जानने की बड़ी इच्छा होती हैं. नीचे जितने भी समय दिए गए हैं (कुछ ख़ास बातें), उन्हें जैन-मन्त्रों के साथ कैसा जोड़ा जाए, ये सब पाठक अब तक की jainmantras.com की पोस्ट पढ़ कर जान ही गए होंगे. यदि नहीं, तो पोस्ट्स मात्र पढ़ें नहीं, उन्हें “धारण” करें.

१४ वीं  शताब्दी में श्री रत्नशेखरसूरीजी ने “दिनशुद्धि” नामक ग्रन्थ प्राकृत भाषा में रचा है. जिसमें “कार्यसिद्धि” के लिए शुभ समय, शुभ मुहूर्त्त, शुभ दिन, कुदरती संकेत, ग्रहों वगैरह का ध्यान रखना, ये सब बातें बतायी हैं.

 

कुछ ख़ास बातें:

१. सभी वार (रविवार से शनिवार) अपने अपने कार्यों में तुरंत फल देने वाले हैं.
२. सोम, बुध, गुरु और शुक्रवार में किये गए “सभी कार्य” सिद्ध होते हैं.
३. रविवार को “राज्य सम्बन्धी” कार्य शुभ हैं. (हो सके तो अफसर/नेता को “रविवार” को मिलें या अपनी प्लानिंग /पेपर्स रविवार को तैयार करने शुरू करें).
४. शनिवार का दिन दीक्षा, वास्तु वगैरह कार्यों में शुभ है.
५. विवाह कार्यों में “गुरु” बलवान होता है.
६. चातुर्मास में “शुभ” कार्य करना “निषेध” हैं.
७. वर (Groom) या कन्या (Bride) अपने भाई बहनों में सबसे बड़े हों, तो जेठ महीने में विवाह करना नहीं. (अब तो संतान ही 1 या 2 ही होती है).

 

८. सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जब बदलता है उस समय को संक्रांति कहते है. उसके आगे-पीछे के दिन भी छोड़कर (कुल तीन दिन) कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.
९. सूर्य-चन्द्र ग्रहण और उसके आगे-पीछे के दिन भी शुभ कार्य के लिए वर्जित है.
१०. अमावस्या के दिन शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए.
११. चौथ, नवमी और चौदस के दिन “शनिवार” हो, तो अनेक कार्य सिद्ध होते है.
१२. प्रवास करने के लिए एकम बहुत अच्छी होती है.
१३. तीज अर्थ (पैसा) सिद्धि कराती है.
१४. तेरस के दिन कार्यवाही शुरू करने से “शत्रु” पराजित होता है.
१५. पूनम के दिन कभी “प्रवास नहीं करना चाहिए.
१६.बुजुर्गों को सता कर, स्त्री को दुखी करके, बच्चे को रुला कर, किसी का अपमान करके और अपशकुन देख कर कभी भी प्रवास नहीं करना चाहिए. कार्य सिद्ध नहीं होता है.
१७. घर में “मांगलिक कार्य” हो तो उसे बीच में छोड़कर नहीं जाना चाहिए.

 

१८. बायीं नासिका (इड़ा नाड़ी) चलती हो तो वो हरेक कार्य में शुभ है. (इसे ही “स्वर विज्ञान” कहते हैं). एक बार पोस्ट पढ़ना बंद करके अभी ही गौर करके देखेंगे तो ये पता पड़ेगा की दोनों नाक में से श्वास एक सी गति से नहीं आता. एक नाक से श्वास को फ़ोर्स ज्यादा रहता है. जैसे बायीं नाक में से श्वास लेने का फ़ोर्स ज्यादा हो, तो उसे इड़ा नाड़ी का चलना कहते है. ये नाड़ी हर 1.5 घंटे बाद बदलती है. यानि डेढ़ घंटे बाद दायीं नाक का श्वास लेने का फ़ोर्स बढ़ेगा.
१९. दायीं नासिका (पिंगला नाड़ी) जब चलती हो तो विद्या, संगीत, साधना, सरकारी काम और पैसे से सम्बन्धी लेन -देन अच्छा रहता है.
२०. गृह प्रवेश के लिए मिगसर, पौष, फाल्गुन, वैशाख और श्रावण महीने उत्तम हैं.
२१. दोपहर के 12.39 समय को “विजय मुहूर्त्त” कहते हैं. ये मुहूर्त्त दोपहर से पहले और बाद की एक घडी का होता हैं यानि दोपहर 12.25 से लेकर 1.03 बजे तक).
२२. शुभ कार्यों में पुष्य नक्षत्र श्रेष्ठ हैं.
२३. सभी योगों में “रवि योग” सबसे अच्छा हैं.
२४. अमृत सिद्धि योग में सभी कार्य सिद्ध होते हैं.
२५. यमघण्ट और पंचक में “परिणाम” आते हैं, परन्तु “ख़राब” आते हैं. 🙂

 

प्रोफाइल फोटो में जितने भी ग्रहों के साथ जो अंक लिखे हैं, उन अंक का ग्रह यदि जन्म-कुंडली में वो ग्रह हो तो वो उच्च का होता हैं. जैसे “सूर्य” यदि 1 नंबर का हैं, तो वो “मेष” राशि का है और मेष राशि में सूर्य उच्च  का होता हैं. उसके सामने वाली राशि यानि नंबर 7 का सूर्य “नीच” का होता हैं. “नीच का सूर्य” बदनामी / अपमान देता है.

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...