ज्योतिष और मंत्र विज्ञान-1

एक ज्योतिषी को किसी की जन्म-कुंडली देखने पर तब तक बोलने के अधिकार नहीं है, जब तक जातक स्वयं या उसके परिवार वाले उससे सम्बंधित प्रश्न ना करे.

“ज्योति” शब्द से “ज्योतिषी” शब्द से बना है. “ज्योतिष” समाज को “राह” दिखाने के लिए है, ना कि डराकर और उल्टी-पट्टी पढ़ाकर  पैसे ऐंठने का साधन हैं.

यदि कोई ऐसा कार्य करता है, वो निश्चित रूप से दुखी रहता है. वर्तमान में ज्यादातर जो “ज्योतिषी” बने हैं, वो बिना साधना के बने हैं. मात्र शास्त्र पढ़ लेने से “ज्ञान” प्रकट नहीं होता. “ज्ञान” साधना से ही प्रकट होता है. पर साधना कैसे हो और किसलिए हो, ये सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न है.

 

12 राशि और 9 ग्रह : एक जन्म कुंडली में 12*9 = 108 Combinations होते हैं.
अरिहंत के 12 गुण और 9 कार यानि  12*9 = 108
( यदि “अरिहंत” को निकाल दें, तो जैन धर्म = शून्य).

जैन धर्म का अस्तित्त्व है तो अरिहंतों के कारण!  

इसीलिए “समस्या-निवारण के लिए एक माला 108 मनको की फेरी जाती है.
ताकि समस्या के जितने भी Combinations हो सकते हों,  वो सब के सब “शुद्ध” हो जाएँ और फिर “शुभ” में कन्वर्ट हो जाएँ.

 

108 मनको की  माला “फेरी” जाती है.

“फेरना” मतलब ख़राब समय को “सीधा ” करना और

यदि समय अच्छा चल रहा है,

तो इसका अर्थ है “फेर-ना” यानि जैसा चल रहा है, वैसा ही रहे !

है ना जोरदार बात -मंत्र विज्ञान की !

ज्योतिष बहुत गूढ़ विषय है. पर फिर भी साधना करने वाला ज्योतिषी अपने “ज्ञान” से ज्यादा और “जन्म-कुंडली” का आधार कम लेता है. “कुंडली” व्यक्ति की सारी बातें नहीं बता सकतीं. (आज आपने क्या खाना खाया है या कितने बजे उठे, ऐसी निरर्थक बातें यदि कोई पूछकर ज्योतिष को चैलेंज करे, तो वो कुतर्क है.  हाँ, महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने में ज्योतिष अवश्य सहायक होता है.

 

ज्योतिष “योग” की बात करता है, हो ही जाने की बात नहीं करता.
“ज्योतिषी” “मुहूर्त्त” भी निकालता है, तो प्रभु-स्मरण करके ही!
ना कि “स्वयम्” ने ऐसा कहा, इसलिए ऐसा हुआ, कोई ज्योतिषी ऐसा दावा करे, तो उससे “दूर” रहें.

गुरु वशिष्ठ ने राजा राम का मुहूर्त्त निकाला राज्याभिषेक का.
और उन्हें मिला क्या?
चौदह वर्ष का वनवास!
क्या गुरु वशिष्ठ से ऊँचा कोई ज्योतिषी वर्तमान में इस दुनिया में है?

 

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...