बहुत ही महत्वपूर्ण
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जय जिनेन्द्र ?

कष्ट, संकट,दुर्भाग्य मिटे,संकट कटे,पीरा मिटे,दरिद्र मिटे…इस तरह के शब्द जिस किसी स्तवन्,भजन आदि में आते हैं ,हमें नहीं पढ़ना ,सुनना,गाना चाहिए?

उत्तर :
——

नहीं!

“तो तुमसे लागी लगन”
भजन मैं सुनुँँ कि नहीं?

उत्तर :
——

ये भजन काफी सालों से खूब सुना जाता रहा है,
इसलिए बहुमत इस के विरुद्ध में
कुछ सुनना पसंद नहीं करेगा.

पर मेरा प्रश्न उन सभी से है कि:

इस भजन में मेटो मेटो जी संकट हमारा
– अभी कौनसा “संकट” सामने है?

(बार बार संकट को रटने से संकट सामने न भी हो
तो आता है – मंत्र सिद्धि जैसा परिणाम देता है)

एक और भी ऐसा भजन है :
(बहुत से हैं)

जब कोई नहीं आता…
मेरे दुःख के दिनों में…
बड़े काम आते हैं..

क्या मस्ती में दुःख को झूम झूम कर खुद बुलाते हैं,
जब कि अभी कोई दुःख है ही नहीं!

इस भजन को कई बार सुनने के बाद,
एक दिन चिंता में पड़ गया कि
दुःख आखिर कौनसा है?
फिर मैंने भजन संध्या में जाना ही बंद कर दिया. ?

विशेष :
——–

“तुमसे लागी लगन”
ये भजन उनके लिए सही है
जिन्हें पार्श्व नाथ की शरण अभी तक मिली नहीं है
भले सैकड़ों बार भजन सुना हो, गाया हो!

क्योंकि प्रभु शरण होने के बाद…
चेतना रहित होकर ये भजन कौन गायेगा?

स्वयं को पापी, दुःखी, भटक भटक, ठोकरें खाना
ये सारे शब्द भी भजन में हों तो वो भजन न गाएं!

प्रभु से जुड़ते ही व्यक्ति शुद्धिकरण की ओर चल पड़ता है, प्रभु के नाम स्मरण से मोक्ष तक मिलता है, तो बार बार वही भजन गाने वाला अभी तक क्या शुद्ध नहीं हुआ?

Final Over :

फिर भी कोई ऐसे भजन गाए ही,
अपने को क्या? ? ?

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