भय निवारक!

(अजित शांति स्तोत्र से)

जिन सूत्रों से एक “अमूल्य रत्न” आज और मिला…

चकित हो गया कि आज तक इसके बारे में
व्याख्यान में किसी ने भी क्यों नहीं बताया! ?

इस लॉक डाउन में कइयों के दिल बैठ गए हैं,
भविष्य की चिंता के कारण
साधना करने में भी असमर्थ हैं…

हाथ जोड़ कर सबसे विनती करता हूं कि
ये सरल विधि है, थोड़ी ही देर में लिख भी सकते हैं.

किसी भी प्रकार की विधि से मुक्त है.
सिर्फ बोलते हुवे लिखना है.
कभी भी लिखना शुरू कर सकते हैं,
कभी भी, कहीं पर भी लिख सकते हैं.

(सामान्य विवेक का ध्यान रखना,
जितनी अच्छी बुद्धि से करेंगे,
परिणाम उतना ही अच्छा आएगा).

एक एक शब्द का….
एक एक अक्षर…
अच्छी तरह बोलना है, बस!

? महावीर मेरा पंथ ?
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