“धर्म सम्प्रदाय” से “चिपक” कर रहना “मुक्ति” में बाधक है.

“व्यक्ति” जब किसी सीमा में “बंध” जाता है
तब अपना “विकास” खो देता है.

यदि “अपना” “व्यक्तित्त्व” नहीं खोना है
तो हमें किसी भी “धर्म-सम्प्रदाय” से नहीं बंधना है.

(क्योंकि “धर्म” तो “खुद” को अपनाना है ना !
हम कोई “सम्प्रदाय” चलाने के लिए “पैदा” थोड़ी हुवे हैं !

परंतु हम जिस सम्प्रदाय में हैं,
उसे “छोड़ना” भी नहीं है.

शंका
***
कहना क्या चाहते हो?

उत्तर:
***
अपनी रोजी रोटी के लिए तो परिवार
अपनी एक मात्र संतान को भी शहर के बाहर
कमाने के लिए भेज देता है.

परंतु इसका अर्थ ये नहीं कि
उसे “घर” से “बाहर” निकाल दिया गया है.

मतलब?
****

उत्तर:

हर पंथ की अपनी “मर्यादा” (limitations) होती है.
यदि दृष्टि “वहीँ” तक रखी
तो “अनेकांत” पढ़ना व्यर्थ है.

सार:
***
कोई भी धर्म सम्प्रदाय
किसी भी सम्प्रदाय की
“मान्यताओं” का “विरोध” ना करे.

यानि अपने अनुयायिओं को भी “गलत” शिक्षा ना दे.
सिर्फ अपनी ही “बात” सही है,
ये “घुट्टी” पिलाना बंद करे.

फिर भी यदि ऐसा हो तो क्या करें?
*********************
ऐसे “संघ” को तिलांजलि दे दें
और अपनी “सोच” से “सच्चे धर्म” के बारे में “खोज” करें.

भगवान् महावीर ने भी “सत्य” की खोज
“स्वयं” करने के लिए कहा है.

इसका रिजल्ट क्या आएगा?
***************
तुरंत ही जैन समाज संगठित हो जाएगा.

फोटो: श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ, गलेमंडी, सूरत 

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...