दिवाली : भगवान महावीर का “मोक्ष कल्याणक”

मैं समझ नहीं पाया कि
भगवान महावीर का “निर्वाण उत्सव” क्यों मनाया जाए?
जिस दिन के बाद भगवान की “प्रत्यक्ष वाणी
जो जगत कल्याण के लिए तीस वर्ष तक बही,
वो इस दिन सदा  के लिए रूक गयी!
क्या “पूर्णता” में इतना मजा है?
कोई कार्य पूर्ण हो जाए, तो फिर उसकी “पूर्णाहुति” के बाद क्या करें?

 

शादी” की रस्म पूरी हो जाने के बाद
सारे परिजन (relatives and friends) अपने अपने घर वापस चले जाते हैं,
घर की “रौनक“चली जाती है.
पर क्या ये सच है
कि शादी के बाद एक “घर” की “रौनक” दूसरे घर चली जाती है?

 

 

घर” से “बेटी” का जाना, इसके लिए कई जन तो वर्षों से तैयारी करते हैं.
और “अचानक” (दिन निश्चित नहीं होता, पर जाना निश्चित होता है)
एक दिन वो “अपना समझा जाने वाला” घर छोड़ कर चली जाती है.
वास्तव में तो “चली” नहीं जाती, वो दूसरे घर “” जाती है.
ये “दूसरा” घर ही उसका “अपना घर” होता है.

हिन्दू संस्कृति में दूल्हे को “वर” कहा जाता है.
वर” यानि वो जिसके लिए ऋषि-मुनि  भी साधना करते हैं
कुछ इच्छित की प्राप्ति के लिए
जिसे  “वरदान” कहा जाता है.

 

अस्तु.

बात चल रही है भगवान के मोक्ष कल्याणक की.
जब एक जीव मोक्ष जाता है तो दूसरा एक जीव “निगोद” से बाहर निकलता है.
(“निगोद” का वर्णन फिर कभी).
यानि एक और जीव के मोक्ष जाने का रास्ता खुलता है.

 

(ध्यान करें कि हम “किसके” कारण “निगोद” से बाहर निकालकर “मनुष्य योनि” में आये हैं – हम “जिसके” कारण आज हैं, वो सिद्धों के मोक्ष जाने के कारण है – यही सिद्धों का हम पर उपकार है – कल्याण की ये परम्परा सदा के लिए  ऐसे ही चलती रहेगी – यदि हम भी मोक्ष जाएंगे, तो दूसरे का कल्याण करेंगे. क्या ये भावना अतिउत्तम नहीं है?).

 

अब आगे की बात:
एक जीव भी इस संसार में आता है.
कुछ दिन के लिए इसे अपना समझ सकता है.
अपना” है नहीं.
सभी को पता है कि “बेटियां” पराया  धन (है.
ऐसी प्रकार ये संसार भी “पराया” है.
जिस प्रकार बेटी को यदि “पीहर(या मेरा कैरियर) का मोह है , तो उसका जीवन “सुखी” नहीं हो सकता
उसी प्रकार जिसे “संसार के सुख” का मोह है, तो उसका अगला “भव” सुखी नहीं हो सकता.

 

इसलिए हमारा  टारगेट है:
मोक्षलक्ष्मी.”
जिसे भगवान महावीर ने “प्रैक्टिकल” करके दिखाया है.

इसीलिए भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाते हैं. भावना करें कि कभी अनेक लोग हमारे निर्वाण उत्सव में भाग लें और हमारे साथ वो भी अपना जीवन सफल करें.
 (अभी तो हम किसी की श्मशान यात्रा तक ही जाते हैं और वहीँ पर उसकी बैलेंस शीट निकालते हैं) 🙂

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