truth

सत्य की महत्ता

जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए
मन में श्रेष्ठ कार्य ही करने की “ठान” लें,
भले ही अभी परिस्थितियां अनुकूल ना हों.

1.भगवान महावीर को भी वो सब “झेलना” पड़ा है
जो हम हमारे लिए “सोच” भी नहीं सकते.
पर रोज भगवान महावीर के

 

“जीवन” के बारे में चिंतन करने पर
मन में उनके प्रति अहोभाव को
कायम रख सकेंगे और
“आत्मविश्वास” बना रहेगा.

2.सत्य की महत्ता

झूठे लोगों के लिए भी होती है.
झूठ को “सत्य” बनाकर परोसा जाता है,
तभी उनका काम बनता है,
ऐसा वो ही नहीं,
सभी महसूस करते हैं.

 

परन्तु “सत्य” को “असत्य” बताने वाले
या सिद्ध करने का प्रयास करने वाले
बहुत “खतरनाक” होते हैं,

ऐसा करने से उन का काम नहीं बनता
बल्कि जो हक़दार होता है,
उसे अपना हक़ नहीं मिलता.

मतलब इससे “भला”
किसी का कुछ भी नहीं होता.

 

3.समर्थ से समर्थ व्यक्ति
कुछ समय के लिए
“असहाय” तब हो जाता है
जब उसे खुद की ही
“समर्थता” से विश्वास
डिग जाता हो.

“जिन धर्म” पर “श्रद्धा” ही
ऐसे समय में
उसे सच्चा रास्ता दिखाती है.

 

4.”सच्ची” बात पर
सभी लोग या ज्यादातर लोग
“सहमत” ही हों,
ये आग्रह ना रखें,

निर्विवाद जीवन जीने का
यही सबसे बड़ा “सत्य” है.
दुनिया में “असत्य” की बोलबाला है.

इसका अर्थ ये नहीं कि
हमें भी उनकी टोली में शामिल होना है.

हमें तो बस ये दिखाना है कि
“सत्य” का आचरण करते हुवे भी
“शानदार जीवन” जिया जा सकता है.

 

5.”मृत्यु” से “भय” उसी को लगता है
जिसे अपना अगला जन्म
वर्तमान से अच्छा नहीं होने की आशंका है.

जिसका अगला जन्म अच्छा है,
उसके अंतर्मन में “भय” होता ही नहीं है.
उसका तो “समाधि मरण” होता है.

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