पुरुषादानीय पार्श्वनाथ

पुरुषादानीय पार्श्वनाथ :

भगवान महावीर ने जब भी श्री पार्श्वनाथ का उल्लेख किया है
तब उनको “पुरुषादानीय पार्श्वनाथ” के नाम से ही सम्बोधित किया है.

“पुरुषादानीय” का अर्थ है :

नाम लेने लायक पवित्र पुरुष!

उन्होंने १०० वर्ष की उम्र पायी

“जीवन” शत प्रतिशत (१००%) सार्थक किया.

उनके नाम स्मरण से सारे कार्य १००% पूरे हो जाते हैं.

 

जिन्हें इस बात की शंका है,

वे सम्यक्त्वधारी नहीं हैं.
इस बात में कोई शंका नहीं है.

जिसका समाज में बड़ा नाम चलता हो,
तो कई लोग उससे पहिचान निकालकर अपना काम करवा लेते हैं.

ऐसे ही इस बात को समझना.

अब पूछो अपने आप से :
आप ने पार्श्वनाथ भगवान से
अपनी पहिचान बना ली है क्या?

 

पहिचान मात्र नाम की है
या वास्तव में है भी!

ये बात आपको सोचने को मजबूर कर देगी कि
आज तक पार्श्वनाथ भगवान को ध्याया
पर कभी मन में उतनी प्रसन्नता नहीं हुई
जितनी अपने छोटे बच्चों को देख कर होती है.

छोटा बच्चा क्या आपको कुछ देता है?
उत्तर है नहीं.
तो फिर प्रसन्नता कैसे होती है?

उसको नहलाने का भी काफी मजा आता है.
नहीं क्या?

 

तो फिर आप इंद्र स्वरुप होकर
जब पार्श्व-प्रभु रुपी “बालक” (प्रतिमाजी) को
सवेरे सवेरे न्हवण (स्नान-अभिषेक) करते हैं
तो कभी वैसी ख़ुशी आई है?

यदि हाँ,
तो आपने अपना मानव भव सफल कर लिया है.

और जानकारी के लिए रोज पढ़ते रहें :

jainmantras.com
फोटो:
ओमकार पार्श्वनाथ

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