मंत्र की 7 भूमिकाएं

मंत्र की 7 भूमिकाएं:
(दो अर्थ और पांच  रहस्य)

१. प्रकट अर्थ
२. गुप्त अर्थ
३. गुप्ततर  रहस्य
४. सम्प्रदाय रहस्य
५. कुल रहस्य

६. निगर्घ रहस्य
७.  परापर-रहस्य

 

जो मंत्र रहस्यों को जानता है,
वह पूजनीय होता है.

हर “व्यक्ति”
मंत्र जानने का अधिकारी होता है.

पर “हर मंत्र” जानने का अधिकार तो
किसी किसी को ही मिलता है.

जिस पर सरस्वती की कृपा हो,
वो ही मंत्र को जानता है
और उसके गुप्त रहस्यों को भी.

सरस्वती की यदि थोड़ी भी कृपा ना हो,
तो प्रकट अर्थ को भी जान नहीं पाता.

 

हर व्यक्ति के नाम में भी “मंत्र” छिपा हुआ रहता है.
इसीलिए हमारे धर्मों में “नामकरण संस्कार” की महता है.
“नामकरण संस्कार” का रहस्य
अभी ज्यादातर ज्योतिषी भी नहीं जानते.
मात्र राशि के अक्षर बता देते हैं.

दुर्भाग्य से नयी पीढ़ी “नामकरण संस्कार”  को  “पोंगा पंथी” समझती है.

यदि जन्म   कुंडली  में कुछ ग्रह कमजोर हैं तो नाम के साथ
सम्बंधित “बीजाक्षर” जोड़ देने से वो ग्रह कमजोर नहीं रहते.

(ये रहस्यमयी है,  पर जरूरत पड़ने पर सीधा उपाय किया जा सकता है).

डॉक्टर ऑपरेशन कैसे करेगा,

हम कभी पूछते हैं क्या?

 

विशेष:

१. संगीत में 7 स्वर होते हैं.
२. सांसारिक सुख भी 7 प्रकार के होते हैं.
३. 7 का अंक हरदम शुभ माना जाता है.

४. आध्यात्मिक जगत में 7 शरीर कहे गए हैं.
५. इन 7 शरीरों में से हर शरीर का  क्रमश: 7 वर्ष में विकास होता है.
प्रश्न :

नवकार, लोगस्स, उवसग्गहरं और नमुत्थुणं इत्यादि
हमारे आचार्य और साधू भी गुनते हैं

और यही अधिकार
श्रावकों को भी दिया गया.

हममें ऐसी कौनसी योग्यता है?

जरा पूछो अपने आप से!

पढ़ते रहें.

Jainmantras.com

फोटो:

ॐ मणिपद्मे हुम्

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