“आत्म-चिंतन” : भाग – 3

एक “बच्चा” जन्म लेता है.
एक “बूढा” मरता है.

समझना एकदम सरल है.

एक “बूढा” मरने के बाद दोबारा “वहीँ” “जन्म”  नहीं ले सकता है
जबकि एक “बच्चा” जन्म लेने के तुरंत बाद वहीँ “मर” भी सकता है.

मतलब मरना तो निश्चित है
पर जन्म लेना निश्चित नहीं है.

 

पर ये बात पूरी सही नहीं है.

कैसे?

“मरना” तो निश्चित है
पर “जन्म” कहाँ लेना है,

ये निश्चित नहीं है.

 

स्पष्टीकरण:

“जन्म” तो होगा ही,
पर हमें ये (और मरने वाले को भी) पता नहीं कि
वो जा कहाँ रहा है!

 

 

More Stories
नवकार का बीजाक्षर “णं” है!
error: Content is protected !!