स्वाध्याय-2

स्वाध्याय है: धर्मसम्बन्धी पुस्तकें –

१. पढ़ना
२. प्रश्न पूछना
३. पुनरावर्तन करना (revision)

 

४. सूत्र अर्थ का चिंतन करना
५. धर्मकथा : कहना और पढ़ना

 

ब्रह्मचर्य का प्रभाव :

“विजय सेठ और विजया सेठानी” का “चरित्र”
जिनदास सेठ विमल केवली भगवंत से विनती करता है कि – अहो, आज मेरे भाग्य खुल गए. आप और आपके साथ रहने वाले 84,000 साधुओं के दर्शन हुवे. मुझे आप सभी की भक्ति करनी है. मुझे आज्ञा दीजिये.
केवली भगवंत कहते हैं: क्या “साधुओं” के लिए रसोई बनाओगे? ये गोचरी तो दूषित होती है जो “साधू” के लिए बनायी गयी हो.
सेठ कहता है: तो क्या मैंने मन मेँ  भक्ति की भावना की और भक्ति किये बिना ही मुझे मरना है? क्या मैं इतना अभागा हूँ? दया करो, कुछ उपाय ही बताओ.

उच्च भावना देखकर “विमल केवली” फरमाते हैं: कच्छ देश मेँ विजय सेठ-विजय सेठानी महान ब्रह्मचारी हैं. तू उनकी भक्ति कर. इससे तुम्हें 84,000 मुनियों की भक्ति करने का फल मिलेगा.

 

ऐसा क्या था उनके ब्रह्मचर्य मेँ?

शादी से पहले विजय सेठ ने जीवन भर शुक्ल पक्ष का ब्रह्मचर्य पालन की प्रतिज्ञा ली थी.

और

योगानुयोग शादी से पहले विजया सेठानी  ने जीवन भर  कृष्ण पक्ष  का ब्रह्मचर्य पालन की प्रतिज्ञा ली थी.

शादी के बाद जब दोनों को पता पड़ा कि उनकी प्रतिज्ञा ऐसी है कि जीवन भर ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा.
दोनों ने तुरंत निर्णय लिया कि जीवन भर तब तक ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे जब तक किसी को हमारे ब्रह्मचर्य पालन की खबर ना हो. जिस दिन किसी को भी इस बात की खबर पड़े, उसी समय दोनों दीक्षा ले लेंगे.
चूँकि जिनदास सेठ ने उनकी भक्ति की और रहस्य प्रकट हुआ, इसलिए दोनों ने दीक्षा ले ली.

 

आज शत्रुंजय तीर्थ के प्रांगण में उनकी मूर्तियां स्थापित हैं.

 

श्रावकों के लिए ब्रह्मचर्य “दुष्कर” नहीं है. सामायिक, उपवास, पच्चखाण, पौषध, तप, स्वाध्याय  इत्यादि उनकी दिनचर्या के अंग हैं.   जैन धर्म पर जो पूर्ण श्रद्धा रखे पर दीक्षा ना ले सके, वो ही वास्तव में “श्रावक” हैं.

मात्र जैन कुल में जन्म लेने वाले “श्रावक” नहीं है, जैन हो सकते हैं,  अब तो सरकार भी जैन होने का “प्रमाण-पत्र ” देती है.  पर आपके असली जैन होने का प्रमाणपत्र तो आपकी “अंतरात्मा “ही देगी.

 

पूछो अपने आप से क्या हम सच्चे जैन हैं?

रात्रि भोजन – हमें मान्य है.
जमींकन्द – हमें मान्य है.
श्रावक की दैनिक क्रिया-पता नहीं
प्रतिक्रमण – Most Boring
व्याख्यान – Sleeping House
जिन सूत्र – ये सब क्या है, पोंगा पंथी!

ये हमारे“उच्च विचार” हैं जो हम “आधुनिक” होने के लिए “जरूरी” समझते हैं.

हमारी “समझ” को क्या कहा जाए!

आगे पढ़ें:- स्वाध्याय-3

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