श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ का मंत्र जप

 पहले नवकार महामंत्र की माला गुणें.

फिर –

ॐ अर्हं
श्री धरणेन्द्र पद्मावती पूजिताय
श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय
मम सर्व ऋद्धिं
कुरु कुरु स्वाहाः ||

 

रोज उतना गुणें जितनी आपकी उम्र है.
अधिक करना चाहें तो मात्र एक और जोड़ सकते हैं.
जैसे आपकी उम्र 52 कम्पलीट है. तो 53 बार गुणें.
गुणते समय ये ध्यान रखें कि जो अभी गुना,
मन में उससे अच्छे भाव आगे गुणने वाले मंत्र में हो.

 

(इस रहस्य को “jainmantras.com” की अगले वर्ष के अंत तक पब्लिश होने वाली पुस्तक “जैनों की समृद्धि के रहस्य में बताया जाएगा).

ये मंत्र ही “नवकार” से निकला है. जलते हुवे नाग के जोड़े को खुद भगवान पार्श्वनाथ ने नवकार सुनाया जिससे वो मरकर धरणेन्द्र पद्मावती बने. नवकार मंत्र की महिमा अपार है. शब्दों में उसे नहीं बताया जा सकता.

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