१. इनका कोई वाहन नहीं है. यानि अपने भक्तों की रक्षा
करने के लिए ये “दौड़े” चले आते हैं.

२. इन्हें प्रसन्न करने के लिए कोई स्तुति नहीं की जाती,
सिर्फ स्तोत्र ही पढ़ा जाता है.

 

३. उनके स्तोत्र में भी उनके “बल” के प्रभाव का ही वर्णन है.
(पुरुषों को उनके “बल” की प्रशंसा करके प्रसन्न किया जाता है
और स्त्रियों को उनकी सुंदरता की प्रशंसा करके प्रसन्न किया जाता है
-ये बात देव और देवियों में भी सामान रूप से लागू होती है).

४. घंटाकर्ण महावीर के बारे में कुछ भ्रामक मान्यताएं :
A. इनका फोटो घर के मुख्य दरवाजे के पास हो और
उनके तीर की दिशा घर के बाहर की तरफ हो.
B. ऐसा करने से घर में कोई विघ्न नहीं आता.

 

शंका निवारण:
घर के मंदिर में महावीरस्वामी के फोटो/मूर्ति  को छोड़कर
अन्य किसी भी तीर्थंकर का फोटो/मूर्ति  लगा सकते हैं.
ये घर के मंदिर में एकदम बीच में स्थापित करें.

घंटाकर्णमहावीर का फोटो भगवान के फोटो के बायीं (left side) ओर रहेगा.
घर की कुलदेवी का फोटो भगवान के फोटो के दायीं (right side) ओर रहेगा.

 

यानि मंदिर के सामने हम यदि देखें तो ये क्रम रहेगा :
1. घंटाकर्ण महावीर,
2. भगवान का फोटो और
3. कुलदेवी का फोटो

(यदि कुलदेवी का अलग से स्थान है तो पद्मावती देवी या
लक्ष्मीजी का फोटो रख सकते हैं).

यदि मूर्ति पर अठारहअभिषेक हुआ हो या ना हुआ हो,
तो भी मंदिर में रख सकते हैं.
जिन्हें ‘देव-दर्शन” का नियम ही है, वे घर के मंदिर में
अठारहअभिषेक की हुई मूर्ति अवश्य रखें.

 

ऐसा करने से स्त्रियों की “पीरियड्स” के  समय उस  फोटो  पर
दृष्टि नहीं पड़ेगी. यदि घर के बाहर की दिशा में लगाएंगे तो अवश्य पड़ेगी.
ऐसा होना जरा भी उचित नहीं है.

अन्य शंका:
कुछ लोग ये मानते हैं की घंटाकर्ण महावीर की
आराधना मात्र रात को ही करनी चाहिए.

 

शंका निवारण:
ये भ्रामक मान्यता है. यदि ऐसा होता तो फिर जिन मंदिरों
में “घंटाकर्ण महावीर” की मूर्ति की स्थापना है, वो मंदिर
रात को बारह बजे तक खुला रहता.

घंटाकर्ण महावीर का स्तोत्र सवेरे पढ़ा जा सकता है
या शाम को या  रात को.
पर सवेरे पढ़ना सबसे अच्छा है.

 

यदि रात्रि में बुरे या डरावने सपने आते हों,
तो रात को सोते समय भी पढ़ना चाहिए.

जहाँ तक हो, घंटाकर्ण महावीर का  स्तोत्र मात्र
एक बार ही पढ़ें और फिर घंटी अवश्य बजाएं.
(रात्रि को सोते समय जब पढ़ें, तो घंटी बजाने की जरूरत नहीं है).