काल सर्प दोष निवारण: 1

काल सर्प दोष निवारण के लिए श्री घंटाकर्ण महावीर का ये स्तोत्र रोज बोलें:
(फोटो देखें)

“नाकाले मरणं तस्य न च सर्पेण डस्यते”

 

काल सर्प योग इस स्तोत्र को पढ़ने से एकदम आसानी से दूर होता है.

जिसे कालसर्प योग हो, वो स्वयं पढ़ें. दूसरे से ना पढवावें.

एकदम सरल स्तोत्र है पर है अति-प्रभावक.

घंटाकर्णमहावीर की मान्यता जैन-अजैन सभी में है.
इन्हें योगनिष्ठ आचार्य श्री बुद्धिसागरजी महाराज ने “सिद्ध” किया है.

(जिन्होंने आज से 70 वर्ष पहले ये भविष्यवाणी कर दी थी की ऐसा समय आएगा कि आदमी घर बैठे (मोबाइल से) कहीं भी बात कर सकेगा).
इनका मूल स्थान “महुडी” (अहमदाबाद के पास) है.

jainmantras.com  के अनुसार इनका “मूल स्थान” “ह्रदय” में है.
बार बार “महुडी” जाने की जरूरत नहीं है.

क्योंकि रोज रोज डॉक्टर के पास जाने की जरूरत उसी को होती है,
जिसे अभी तक डॉक्टर के इलाज़ से फायदा ना हुआ हो.

 

जो स्वभाव से झूठे हैं, उन्हें घंटाकर्ण महावीर की साधना से डर लगता है.

स्तोत्र पढ़ने के अन्य फल:

१. शरीर में बिमारी नहीं रहेगी.
२. घोर संकट आया हो, तो तुरंत निवारण होता है.
३. राजभय (government-court case etc.) नहीं रहता है.

 

विशेष:
यदि बच्चे को बीमारी हो, तो स्तोत्र उसके “दायेंकान” में धीमेधीमे पढ़ दें.
(दवा भी चालू रखें).
जिस समस्या का निवारण सामान्य बुद्धि से हो सकता हो, वहां मंत्र प्रयोग ना करें क्योंकि ऐसा करने से अकर्मण्यता आती है.

जिनकी कुंडली में कालसर्प योग के साथ मंगल भी है, साथ में चन्द्र राहु के साथ बैठा हो, उन्हें घंटाकर्ण महावीर का  स्तोत्र स्तोत्र पढ़ने से तुरंत फायदा मिलता है:-
घंटाकर्ण महावीर का “यन्त्र” रखकर स्तोत्र पढ़ें और  निम्न जाप करें (रोज मात्र  12 बार)

ॐ ह्रीं घन्टाकर्णो नमोSस्तुते ठ: ठ: ठ: स्वाहा ||

कुछ पुस्तकों में “अन्य मंत्र” भी दिए गए हैं, परन्तु मूल मंत्र यही है और सबसे सरल और प्रभावी भी.

यदि किसी ने घंटाकर्ण  महावीर की साधना अन्य मंत्र से की हो और फल ना मिला हो तो इसका मतलब उसने जिससे  “मंत्र“लिया” है, उस व्यक्ति को  मात्र “मंत्र” की “जानकारी” है, उसने स्वयं उस मंत्र को सिद्ध नहीं किया है.

 

अति विशेष:
यदि कुछ भी ना कर सकें तो किसी भी जैन मंदिर में जहाँ घंटाकर्ण महावीर की मूर्ति लगी हो वहाँ उन्हें नमस्कार करके घंट बजा दें. ये समस्याओं के लिए यम-घंट के समान होता है यानि फिर समस्याएँ नहीं रहेगी.
(कड़ी शर्त्त : विचार और वर्त्तन दोनों सौ प्रतिशत शुद्ध रखें- ऐसा ना हो कि बिना विचार कुछ भी करें और फिर समस्या कड़ी हो तो घंट बजाने के लिए दौड़ें).

 

घंटाकर्ण महावीर के रहस्मयी प्रभाव का वर्णन jainmantras.com  की अगले वर्ष पब्लिश होने वाली पुस्तक “जैनों की समृद्धि के रहस्य” में बताया जाएगा. समस्या का निदान तो ऊपर बताये तरीके से ही हो जाएगा.

ये विधि सिर्फ “पुरुषों” के लिए है.  स्त्रियों के लिए अलग से पोस्ट पब्लिश होगी.

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