क्या कभी कभार पाप करने की छूट मिल सकती है?

क्या “मौज-मस्ती” के लिए कभी कबार पाप करने की छूट मिल सकती है?
(Whether sin be allowed sometimes to commit)?

कुछ लोगों का कहना है कि
मैं तो बस कभी कभी “ड्रिंक” कर लेता हूँ.
मैं तो बस कभी कभी…..इत्यादि

अब कभी कबार “पाप” करने
और रोज पाप करने वाले में
फर्क को ढूंढ कर बताएं.

ये एक ही बात जो “उदाहरण” स्वरुप है,
आपको “पूरी” तरह “हिला” कर रख देगी.

मानो कि किसी की पत्नी आज “पहली” बार
किसी के साथ “भाग” गयी
और “दूसरे” दिन सवेरे ही आ गयी,
तो क्या आप कह सकेंगे
कि एक दिन में
ऐसी कौन सी बर्दाश्त ना करने वाली बात हो गयी !

ये बात तो आप फिर भी पढ़ सकेंगे.
यदि ऐसा ही “खुद” के बारे में सोचें
तो “आँखों” के “आगे” “अँधेरा” आ जाएगा.

“पाप” का सिर्फ एक बार “सेवन”
इतना “भयंकर” नतीजा देने वाला है.
तो जो रोज पाप करता है, उसके बारे में ……

(ये बात केशी श्रमण और प्रदेशी राजा के बीच में हुई है
– जैन धर्म के “कुछ” उदाहरण “पूरी” तरह “हिला” देने वाले होते हैं,
वरना इस काल में इतनी “दीक्षाएं” नहीं हो सकती थीं).

इसीलिए जैन धर्म का सच्ची तरह पालन करने वाला बहुत “चुस्त” होता है.

प्रश्न:
हम किस “केटेगरी” में आते हैं?

Advertisement

spot_img

जैन धर्म को शुद्ध...

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार...

भक्ति की शक्ति तभी...

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़...

किसी ने पूछा कि...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस...

अरिहंत उपासना – श्री...

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी...

आत्मा से विमुख हर...

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के...

जैन धर्म में “तापसी”...

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया...

जैन धर्म को शुद्ध रूप से कैसे अपनाएं?

केवली कहते हैं कि 1 लाख मुख से नवकार की महिमा कही जाए तो भी पूरी नहीं हो सकेगी.आज? कितने व्याख्यान सुने नवकार की महिमा...

भक्ति की शक्ति तभी आती है जब सर्वज्ञ भगवान की महिमा पर विश्वास हो

जैन मंत्रों का प्रभाव जो पहले से धर्म से जुड़ गए हैं उन्हें परिणाम अपने आप मिलता है, जो परिणाम के लिए धर्म क्रिया करते...

किसी ने पूछा कि “तप” करने से कर्म कटते हैं. उस से “आत्मा” प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले...

जिज्ञासा: किसी ने पूछा कि "तप" करने से कर्म कटते हैं. उस से "आत्मा" प्रकाशित होती है. तो फिर उसका पता कैसे चले कि आत्मा हलकी हुई है या कर्म...

अरिहंत उपासना – श्री वासुपूज्य स्वामी यंत्र

अरिहंत उपासनापूर्व कृत कर्मों का नाश, सुखी जीवन और मोक्ष भी निश्चित!कन्द मूल और रात्रि भोजन का त्याग करना, रोज नवकारसी करना.वासु पूज्य स्वामी की प्रतिमा या...

आत्मा से विमुख हर साधना “मिथ्यात्त्व” है

जैनों के कुछ संप्रदाय "देव-देवी" की सहायता लेने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मान्यता के अनुसार ये "मिथ्यात्त्व" है. (आत्मा से विमुख हर साधना "मिथ्यात्त्व"...

जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है

जैन धर्म में "तापसी" के "तप" को बहुत "हल्का" बताया गया हैक्योंकि उसमें "अज्ञानता" है, सिर्फ तप से तप रहा है.( ऐसे तप से उसमें भयंकर...

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य अरिहंत की शरण लेने से मिलता है

जैन वो हैं जिनके चेहरे से भी पुण्य झलकता है, ये पुण्य 🌹अरिहंत की शरण🌹 लेने से मिलता है. गर्भ से ही जैन सूत्रों और मंत्रों...

Jainmantras.com द्वारा प्रसारित अकेले लघु शांति ने हज़ारों लोगों को जैन धर्म के प्रति जाग्रति दी है और चैन की नींद भी!

Jainmantras.com ग्रुप की शुरुआत में सभी को पांच सूत्र रोज करने को कहा है, ताकि श्रावक अपना जीवन सुखमय और धर्ममय कर सकें.इन सबके...

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए

श्रावकों को इधर उधर भटकना बंद करके जैन मंत्रों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए.ये मनुष्य भव ही है जिसमें उत्कृष्ट साधना करते हुवे जीवन सुख...