purusharth,purushartha

पुण्य या पुरुषार्थ?

दो बच्चे एक ही समय में अलग अलग घर में जन्म लेते हैं.
एक अमीर के घर में और दूसरा गरीब के घर में.
बचपन तक दोनों बच्चे कोई “पुरुषार्थ” नहीं करते
फिर भी एक को सब सुविधाएं मिलती है और दूसरे को सभी असुविधाएं.

ऐसा क्यों होता है?
उत्तर है: एक पुण्य लेकर आया है और दूसरे को “पुण्य” प्राप्त करने  के लिए “पुरुषार्थ” करना होगा.

 

(खुद के पुण्य “स्थिति” कहाँ पर है, ये जरा चेक करें. यदि बहुत “पुरुषार्थ” (labour) के बाद भी “रिजल्ट” नहीं मिलता है, तो इसका मतलब है कि “पुण्य” क्ष्रीण  अवस्था (poor condition) में है.

मजे की बात तो ये है कि जिस बच्चे को  “असुविधाएं” मिलती हैं, उसका अहसास तक उसे नहीं होता.
क्योंकि उसे “ज्ञान” ही नहीं होता कि दूसरे की अपेक्षा मुझे उतनी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.
इसलिए उसे किसी से कोई शिकायत भी  नहीं होती.

 

शंका :
तो क्या ज्ञान होना “दुःख” का कारण है?

उत्तर:
अज्ञानी को “गुटका” खाने मात्र से ही परम सुख मिल जाता है.
तो क्या हर व्यक्ति को गुटका खाना चाहिए?
क्या उसे ज्ञान नहीं होता कि वो “कैंसर” को न्यौता दे रहा है?

कहने की बात ये है कि उसे इस बात का “ज्ञान” है फिर भी वो “अज्ञानता” की “चपेट” में है!
कहीं कहीं तो बात यहाँ तक है कि कैंसर जब होगा, तब देखा जाएगा!
(क्योंकि जो गुटका नहीं खाते,  उन्हें भी तो कैंसर होता है).

 

उनके इस “तर्क” को “दाद” देनी पड़े
क्योंकि खुद के “अहित” करने में भी वो “मजा” ले पाते हैं!

क्या यही स्थिति “प्रवचन” सुनने के बाद भी बाकी लोगों की नहीं है?
“ये संसार दुखों  का जाल है”…उसे वे सुनकर भी नहीं “समझना” चाहते.

 

पुण्य या पुरुषार्थ?

पुण्य के जोर से व्यक्ति “पुरुषार्थ” करता है या “पुरुषार्थ” से पुण्य को जाग्रत करता है?
इसका उत्तर कुछ हद तो भ्रमित करने वाला है.
(अंडा पहले या मुर्गी जैसा)
यदि शरीर ही स्वस्थ नहीं है, तो इसका मतलब इतना पुण्य भी उसके पास नहीं है.
इसलिए पुरुषार्थ भी नहीं कर सकेगा.
और जिनका “पुण्य” प्रबल है, वो ज्यादातर पुरुषार्थ करते नहीं हैं.
क्योंकि जिसे “सुविधाएं” प्राप्त हैं, वो भला “मेहनत” क्यों करना चाहेंगे?

 

बात ये है कि हर एक को “पुरुषार्थ” अपनी वर्तमान “व्यवस्था” को देखकर करना चाहिए,
इतना “विवेक” यदि उसमें जग जाए, तो फिर ये जीवन निश्चित रूप से सफल हो जाए.

विशेष:-
पोस्ट में कई गूढ़ बातें लिखी है, मात्र एक बार पढ़ने से समझ में आना मुश्किल है.
इसलिए पोस्ट को 2-3 बार पढ़कर उस पर चिन्तन करें.

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