“जन्म कुंडली” से “भविष्य” जानना सभी को “अच्छा” लगता है,
भले ही “भविष्य” अच्छा ना हो.

CRB ग्रुप के नाम से फाइनेंस कंपनी चलाने वाले CA चैन रूप भंसाली
की पत्नी ने ज्योतिषी से पूछा था :
इनका आगे अब कैसा रहेगा?
(तेरापंथ समाज का  पूरा पैसा इसी ग्रुप में लगा था, जो पूरा डूबा).
उत्तर था:
आज तक ही ठीक है,
बाकी तो कुछ बचा ही नहीं है.

यही हाल “शेयर बाजार” को
अपनी उँगलियों पर नचाने वाले
हर्षद मेहता का हुवा, आदि.

पोस्ट को दोबारा पढ़ें,
“Perfect Solution”  का  दावा करने वाले
नामी “ज्योतिषियों” ने कुछ किया?
“साधना” के बिना कुछ भी “सिद्ध” नहीं हो सकता.

जैन धर्म में इन सबका एकदम सरल उपाय है:
ख़राब से ख़राब ग्रह भी हों तो “जिन-दर्शन” पूजन से
उनका निवारण एकदम सरल तरीके से हो जाता है.

प्रभु की प्रतिमा के आगे बड़े भाव से “चैत्य वंदन करें”
नमोSत्थुणं सूत्र से.

(नमोत्थुणं सूत्र jainmantras.com में पहले से ही पब्लिश हो चूका है. इसके अलावा नमोत्थुणं सूत्र  हर जैन साधू-साध्वीजी के पास सुलभ है, प्रतिक्रमण की पुस्तकों में छपा हुवा भी मिल ही जाता है).

फोटो (SKR) : श्री “धर्मचक्र पार्श्वनाथ”
लेखक के आवास पर, पिपलोद, सूरत

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जैन धर्म में “तापसी” के “तप” को बहुत “हल्का” बताया गया है
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