जब व्यक्ति को अचानक से “डर” लगने लगता है
या नकारात्मक विचार हावी होते हों,
तो इसे ज्योतिष के अनुसार “राहु” का प्रभाव समझें.

“राहु” सबसे पहले “मस्तक” (head) पर असर करता है.
क्यूंकि उसके खुद के पास सिर्फ “मस्तक” ही है,
शरीर है ही नहीं.

जैन धर्म के अनुसार निर्भीकता आती है :
“आत्म-तत्त्व” को स्वीकार करने से.
और एक जैन साधू दीक्षा लेते ही इसी में रम जाता है.

ॐ ह्रीम- नमो लोए सव्व साहूणं
इस मंत्र का खूब जाप करें.
(इसका फल बहुत बड़ा है).

कोई समय बंधन नहीं है
कोई संख्या निर्धारित नहीं है

बस पूरी श्रध्दा से करें.

घर में श्री नाकोड़ा भैरव देव का फोटो लगाएं.

सवेरे और शाम को दीपक और अगरबत्ती भी करें
(सारे भैरवों में श्री नाकोड़ा भैरव देव सबसे सरल है और तुरंत फल देने वाले है).

मुझे 41 वर्षों से अनुभव सिद्ध है.

याद रहे, जैन मंत्र “आत्म-साधना” के लिए है, सांसारिक कार्यों को सिद्ध करने के लिए नहीं.

किसी भी “एक फक्कड़ जैन साधू” की मन से सेवा करें – विशेषत” जो रोगी या वृद्ध हों, कई कार्य अपने आप सिद्ध हो जाएंगे. उनसे कोई वासक्षेप या आशीर्वाद मांगने की भी जरूरत नहीं है, उनका “मन” जिस दिन जीत लिया, सब सुख अपने आप बरसेगा.

यदि गुरु उपलब्ध ना हों, तो घर पर ही अपने गुरु की फोटो के सामने उपरोक्त जाप करें.

यदि किसी भी गुरु पर सम्पूर्ण श्रध्दा ना बैठती हो, तो गुरु गौतम स्वामी के फोटो के सामने ये जाप करो, बहुत अच्छा रिजल्ट आएगा.

अति विशेष:  जिसे तीर्थंकरों पर सम्पूर्ण श्रध्धा है,
उन्हें तो किसी से भी डर लगता ही नहीं है.
 
श्री नमोत्थुणं सूत्र में “अभयदयाणं” पद को बोलने के साथ ही
उसके सारे भय भाग जाते हैं.