स्त्रियां कौनसे स्तोत्र ना पढ़ें?

स्त्रियां घंटाकर्ण महावीर का स्तोत्र, नाकोड़ा भैरव चालीसा और मणिभद्र वीर इत्यादि के हवन में भाग ना लें.
इनसे सम्बंधित मंत्र का जप तो कभी भी ना करें.

प्रत्यक्ष ऐसे उदाहरण सामने आये हैं कि  जो जो स्त्रियां ऐसा करती हैं, उन्हें जीवन में रोज परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
एक परेशानी  दूर होती है और नयी परेशानी खड़ी हो जाती है.

 

हाँ, भजन गाये जा सकते हैं. भक्ति करने की पूरी छूट  है. आरती भी कर सकते हैं. पूजा नहीं करनी चाहिए.

जो स्त्रियां उपरोक्त स्तोत्र, चालीसा और हवन में भाग लेती हैं, उन्हें सांसारिकसुख नहीं मिलता है. मिलता भी है तो बड़े कष्ट भोगने के बाद. एक अन्य महिला जो ऊँचे पद पर है, वो सांसारिकजीवन में सुखी नहीं है. ऊँचा पद  मिला है घंटाकर्ण महावीर की साधना से. पिता स्वरुप  मानकर भी यदि उनके मंत्र जपे जाएँ, तो कर्म (कार्य) सिद्धि मिल जायेगी  क्योंकि जन्म कुंडली में पिता और कर्म का स्थान एक ही होता है. पर “सुख” नहीं मिलेगा.

 

स्त्रियों को “सुख” प्राप्त करने के लिए “माता पद्मावती या माताचक्रेश्वरी”  के मन्त्रों का ही जाप करना चाहिए. माता पद्मावती  का मंत्र jainmantras.com में पहले ही पब्लिश हो चुका है. चक्रेश्वरी माता का मंत्र शीघ्र ही पब्लिश होगा.

मातापद्मावती का इष्ट कई साध्वीजी को है, ऐसा जानकारी में है. श्री राजयशसूरी जी की सांसारिक बहन महाराज को “पद्मावती” जी की सहायता है, इसके कारण कई कार्य आसानी से सिद्ध हुवे है.

माँ अपने बच्चों की भूलों को आराम से माफ़ कर देती है. इसलिए माता स्वरुप पद्मावती और चक्रेश्वरी के मंत्र जप में भूल भी हो जाए, तो वो हमें माफ़ कर देती हैं.

 

खरतर गच्छ  की अतिप्रभावी साध्वीजी श्री हेमप्रभाश्री जो नाकोड़ा भैरव देव की “साधक” थीं, वे अपने “अंतिम-समय” में कार्य पूरा नहीं कर पायीं और “अकालमृत्यु” को भी प्राप्त हुई. इससे ये भी सिद्ध होता है कि अंतिम समय में नाकोड़ा भैरव देव ने उनकी रक्षा नहीं की. कारण? “साधना” में दोष रहा. कोई  आचार्य भी किसी साध्वीजी को घंटाकर्ण महावीर और नाकोड़ा भैरव देव का मंत्र नहीं देते.

(अकाल मृत्यु ना हो, इसके लिए jainmantras.com में पब्लिश हुवे “श्री आत्म-रक्षा स्तोत्र” को रोज अवश्य पढ़ें. चाहे शहर से बाहर  जाना ना भी हो. एक्सीडेंट शहर के अंदर भी तो हो सकता है ना).

More Stories
jirawala parshvanath
श्री जीरावला पार्श्वनाथ भगवान
error: Content is protected !!