काउसग्ग करते समय 1 लोगस्स = 4 नवकार – ऐसा क्यों ?

प्रश्न:

काउसग्ग करते समय 1 लोगस्स = 4 नवकार

ऐसा क्यों?

क्या लोगस्स सूत्र,
नवकार से 4 गुना बड़ा है?

उत्तर:

१. कुछ जैनों को नवकार से आगे कुछ नहीं आता.

२. ऐसे श्रावक भी प्रतिक्रमण विधिपूर्वक पूरा कर सकें, इसलिए पंचम और अंतिम श्रुत केवली श्री भद्रबाहु स्वामी जिनको श्वेताम्बर और दिगंबर दोनों मानते हैं, उन्होंने ऐसी व्यवस्था की.

लोगस्स नवकार से लगभग चार गुना बड़ा है.
प्रतिक्रमण करते समय सभी श्रावक
काउसग्ग एक साथ पूरा कर सकें,
इसके लिए उन्होंने ऐसी व्यवस्था की

श्रावक के 6 आवश्यक बताये गए हैं.

१. सामायिक (करेमि भंते)
२. चउवीसत्थो ( प्रकट लोगस्स – सुनाई दे वैसा बोलें )
३. वंदना (इच्छामि खमासमणो)
४. पडिक्कमणु (प्रतिक्रमण)
५. काउसग्ग ( लोगस्स एवं/या नवकार -मन में ध्यान लगाना )
६. पच्चखाण (नवकारसी इत्यादि)

कम से कम 3 आवश्यक हर जैनी को रोज करने चाहिए:

१. रोज 3 नवकार गुणना
२. रोज 3 लोगस्स गुणना
३. नवकारसी करना/देव दर्शन/गुरु वंदन
(हो सके तो तीनों करें –
देव-गुरु दर्शन यदि व्यवस्था ना हो
तो घर पर ही फोटो/प्रतिमा लगाकर करें)

इसमें कुल 10 मिनट लगेंगे.

यदि 10 मिनट भी ना निकलें तो सोचें
कि क्या आपको जैनी कहलाने का अधिकार है?

ये भी सोचें कि जैनी कहलाने का अधिकार
आपसे क्यों ना छीन लिया जाए?

?महावीर मेरा पंथ ?

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